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जमीन हमारी, फैसला हमारा — उमरिया में फूटा जनआक्रोश, अब आर-पार की लड़ाई

 उमरिया की आवाज पहुंची राष्ट्रीय स्तर तक, किसानों को मिला राष्ट्रीय नेतृत्व का बल — कॉलरी कंपनियों की मनमानी के खिलाफ भारतीय किसान संघ की हुंकार

जमीन हमारी, फैसला हमारा — उमरिया में फूटा जनआक्रोश, अब आर-पार की लड़ाई

उमरिया। जिले के घुनघुटी, पत्नार, ओरेरा और मालाचुआ क्षेत्र में किसानों की जमीन पर कथित दबाव, कॉलरी कंपनियों की मनमानी और प्रशासनिक मिलीभगत को लेकर संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय किसान संघ जिला इकाई उमरिया द्वारा उठाई गई आवाज अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है और जिले के किसानों को राष्ट्रीय नेतृत्व का खुला बल मिला है, जिससे शासन-प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन में हलचल तेज हो गई है।

भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल द्वारा बजरंग पावर एवं अन्य कोयला कंपनियों की मनमानी और किसानों के साथ हो रहे अन्याय की शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचाने के बाद राष्ट्रीय स्तर से अखिल भारतीय संघ सदस्य श्रीमती गिरिजा ठाकुर तथा महाकौशल प्रांत के संगठन मंत्री तुलाराम भाई उमरिया पहुंचे। दोनों पदाधिकारियों ने घुनघुटी, पत्नार, ओरेरा और मालाचुआ क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद किया और जमीनी हालात का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने प्रशासन एवं कॉलरी कंपनियों के रवैये को अमानवीय, अनैतिक और किसान विरोधी बताया। किसानों ने आरोप लगाया कि कॉलरी कंपनी के अधिकारी घर-घर जाकर पूर्व निर्धारित प्रारूप में जबरन हस्ताक्षर कराने का दबाव बना रहे हैं, जो प्रशासनिक नियमों और दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है।

महाकौशल प्रांत के संगठन मंत्री तुलाराम भाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा—

“जमीन किसानों की है और किसानों की सहमति के बिना कोई अधिकारी या कंपनी प्रबंधन उसे छीनने का अधिकार नहीं रखता। भारतीय किसान संघ किसानों के हक की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ेगा।”

भारतीय किसान संघ ने साफ चेतावनी दी है कि किसानों के अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ ने ऐलान किया कि जब तक दोषी अधिकारियों एवं कॉलरी प्रबंधन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन और संघर्ष जारी रहेगा।

इस आंदोलन को अब राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर का खुला समर्थन मिल चुका है, जिससे किसानों का मनोबल और मजबूत हुआ है। संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

इस दौरान जिला एवं पाली तहसील समिति के प्रमुख सदस्य देवकी नंदन, भामा नायक, श्याम गुप्ता, पुरुषोत्तम भाई साहब, उदय नायक, सियाराम, मुन्ना सहित बड़ी संख्या में किसान भाई एवं संघ के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया

चेतावनी

यदि प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन ने समय रहते किसानों की आवाज नहीं सुनी, तो उमरिया की यह चिंगारी जल्द ही प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकती है। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और संबंधित कंपनियों की होगी।

भारतीय किसान संघ का स्पष्ट संदेश

“किसानों की जमीन पर जबरन कब्जे की हर कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।”

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