कागजों में विकास, ज़मीन पर अंधेरा: बैगा बहुल बाघन्नारा गांव आज भी बिजली से महरूम
छोटेलाल बैगा पूर्व सरपंच
उमरिया से बड़ी खबर | बिरसिंहपुर पाली ब्लॉक
मध्य प्रदेश सरकार भले ही आदिवासी विकास और बैगा जनजाति के उत्थान के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली ब्लॉक का बाघन्नारा गांव इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
बैगा जनजाति बहुल इस गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई। कई सरकारें आईं और चली गईं, योजनाएं बनीं, बजट स्वीकृत हुए, लेकिन बाघन्नारा आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर है।
बिजली नहीं, योजना बेकार
गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई, पानी की टंकी भी स्थापित की गई। लाखों रुपये खर्च हुए।
लेकिन बिजली के अभाव में पूरी योजना ठप पड़ी है। टंकी में पानी भरने के लिए बिजली चाहिए — जो आज तक नहीं आई।
ट्रांसफार्मर लगा है, बिजली के तार खिंचे हैं, लेकिन करंट का नामोनिशान नहीं।
बच्चों की पढ़ाई पर असर
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
बिजली न होने से बच्चे अंधेरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन शिक्षा और स्मार्ट क्लास की बात होती है, वहीं बाघन्नारा के बच्चे आज भी लालटेन और ढिबरी के सहारे सपने देख रहे हैं।
पानी के लिए संघर्ष
महिलाएं आज भी हैंडपंप और कुओं के भरोसे हैं।
कई हैंडपंप खराब पड़े हैं, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नल-जल योजना होने के बावजूद गांव में पेयजल संकट बना हुआ है।
जनप्रतिनिधियों पर सवाल
ग्रामीणों ने कलेक्टर से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई, लेकिन स्थिति जस की तस है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
गांव की सरपंच सत्ताधारी दल से जुड़ी हैं
क्षेत्र में भाजपा विधायक हैं
फिर भी बैगा बहुल गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों?
बड़ा सवाल
जब ट्रांसफार्मर लग सकता है, तार खिंच सकते हैं, पानी की टंकी बन सकती है —
तो आखिर बिजली क्यों नहीं आ सकती?
क्या विकास सिर्फ कागजों तक सीमित है?
क्या आदिवासी क्षेत्रों के नाम पर योजनाएं सिर्फ बजट खर्च करने तक सिमट गई हैं?
अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और कब बाघन्नारा के ग्रामीणों के जीवन में सचमुच उजाला पहुंचता है।

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