जनसुनवाई के बाद होटल में दावत और गिफ्ट! अधिकारियों की निष्पक्षता पर उठे बड़े सवाल
घुनघुटी-पत्नार में बजरंग पावर की जनसुनवाई विवादों में, भारतीय किसान संघ ने लगाए गंभीर आरोप
( उमरिया से अभिषेक अग्रवाल )
उमरिया। घुनघुटी-पत्नार क्षेत्र में बजरंग पावर कंपनी द्वारा आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई कार्यक्रम अब बड़े विवादों में घिरता नजर आ रहा है। एक ओर जहां ग्रामीणों और किसानों ने कॉलरी व उद्योग से होने वाले प्रदूषण, स्वास्थ्य समस्याओं और खेती पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की, वहीं दूसरी ओर जनसुनवाई में शामिल प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कार्यक्रम में कलेक्टर प्रतिनिधि एवं पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अशोक तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। भारतीय किसान संघ, जनप्रतिनिधियों और किसानों ने क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण, जल संकट, धूल-धुएं और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
लेकिन जनसुनवाई समाप्त होने के बाद जो तस्वीरें और चर्चाएं सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। भारतीय किसान संघ का आरोप है कि जनसुनवाई में शामिल अधिकारी बाद में शहडोल स्थित सूर्या इंटरनेशनल होटल में बजरंग पावर कंपनी द्वारा आयोजित भोजन कार्यक्रम में शामिल हुए और वहां कंपनी की ओर से गिफ्ट भी स्वीकार किए गए।
“जब सुनवाई करने वाले ही कंपनी के मेहमान बन जाएं तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक”
भारतीय किसान संघ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस कंपनी के खिलाफ ग्रामीण अपनी समस्याएं और आपत्तियां दर्ज करा रहे हों, उसी कंपनी के आतिथ्य को स्वीकार करना प्रशासनिक निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। संघ ने कहा कि यदि अधिकारी कंपनी के कार्यक्रमों में शामिल होकर उपहार स्वीकार करेंगे तो किसानों और ग्रामीणों को निष्पक्ष न्याय मिलने का भरोसा कैसे रहेगा?
संघ ने आरोप लगाया कि एक ओर प्रशासन पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई की बात करता है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी खुलेआम ऐसी गतिविधियों में शामिल होकर अपनी भूमिका को संदेह के घेरे में ला रहे हैं।
मामला जिला से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने इस पूरे मामले का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि विषय को जिला, संभाग, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में उठाया जाएगा। संघ ने मांग की है कि जनसुनवाई प्रक्रिया की निष्पक्षता की जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि क्या सरकारी अधिकारियों के लिए संबंधित कंपनी के आतिथ्य और उपहार स्वीकार करना नियमों के अनुरूप है।
क्षेत्र में अब यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर जनसुनवाई जनता के लिए थी या कंपनी के पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए।

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