बांधवगढ़ में डी-1 का बढ़ा वर्चस्व, खितौली का ‘राजा’ बना पर्यटकों की पसंद
पुजारी के बाद डी-1 ने कायम किया दबदबा, आक्रामक अंदाज और दमदार कद-काठी ने बढ़ाई लोकप्रियता
शहडोल 19 अगस्त 2026- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की दुनिया में इन दिनों डी-1 बाघ अपनी दमदार मौजूदगी और प्रभावशाली क्षेत्रीय वर्चस्व के कारण चर्चा में है। प्रसिद्ध बाघ पुजारी के दौर के बाद डी-1 ने खितौली क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित किया है। वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ पर्यटकों, गाइड और वन्यजीव फोटोग्राफरों के बीच भी डी-1 की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
खितौली रेंजर स्वस्ति श्री जैन के अनुसार, डी-1 को खितौली का राजा कहा जाता है। वह बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रभावशाली और प्रभुत्वशाली नर बाघों में शामिल है। डी-1 प्रसिद्ध बाघिन डॉटी का पुत्र है, जबकि उसके पिता के रूप में प्रभावशाली नर बाघ महामन को माना जाता है। मजबूत वंश और प्रभावशाली शारीरिक बनावट के कारण डी-1 ने बांधवगढ़ के बाघों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।
खितौली क्षेत्र में स्थापित किया साम्राज्य
डी-1 ने खितौली जोन में अपना क्षेत्र स्थापित किया है। अपने क्षेत्र की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ वह लगातार अपना प्रभाव बढ़ाता रहा है। उसका मूवमेंट खितौली के अलावा पनपथा और धमोखर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी देखा गया है। पुजारी के साथ वर्चस्व की लड़ाई के बाद खितौली कोर टूरिज्म क्षेत्र सहित पनपथा-पचपेड़ी क्षेत्र में भी डी-1 की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है।
पुजारी के साथ संघर्ष के बाद बढ़ी लोकप्रियता
बांधवगढ़ के प्रसिद्ध बाघ पुजारी को वन्यजीव प्रेमियों के बीच ‘जेंटलमैन ऑफ द जंगल’ के नाम से जाना जाता था। इसके विपरीत डी-1 अपने आक्रामक और प्रभावशाली व्यवहार के लिए पहचाना जाता है। दोनों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर कई बार संघर्ष की स्थिति बनी।
मई 2026 में दोनों के बीच हुआ भीषण संघर्ष बांधवगढ़ के बाघों के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल हो गया। इस संघर्ष में पुजारी गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद खितौली क्षेत्र में डी-1 का प्रभाव और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया।
विशाल कद-काठी और दमदार अंदाज
डी-1 अपनी विशाल एवं शक्तिशाली कद-काठी के लिए भी जाना जाता है। वन्यजीव क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार उसका वजन लगभग 220 से 250 किलोग्राम के बीच माना जाता है। अपने विशाल शरीर, निडर स्वभाव और प्रभावशाली चाल के कारण डी-1 पर्यटकों तथा वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
पुजारी के बाद नए अध्याय की शुरुआत
पुजारी की मृत्यु के साथ खितौली क्षेत्र में एक चर्चित बाघ के युग का अंत हुआ, वहीं डी-1 के वर्चस्व ने बांधवगढ़ की बाघ गाथा में नए अध्याय की शुरुआत की है। नेचुरलिस्ट सुनील यादव के अनुसार, डी-1 वर्तमान में बांधवगढ़ के सबसे लोकप्रिय बाघों में शामिल है। पुजारी के साथ हुए संघर्ष के बाद पर्यटकों के बीच डी-1 को देखने की उत्सुकता और बढ़ी है।
बांधवगढ़ आने वाले पर्यटकों के लिए डी-1 अब उन प्रमुख बाघों में शामिल हो गया है, जिनकी एक झलक पाने के लिए सफारी के दौरान विशेष उत्सुकता रहती है। खितौली क्षेत्र में उसका दबदबा और आकर्षक व्यक्तित्व उसे बांधवगढ़ के चर्चित बाघों की सूची में खास स्थान दिला रहा है।

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