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उमरिया में किसानों के महाआंदोलन का ऐलान, 9 सितंबर से हाईवे घेरने की चेतावनी

 उमरिया में किसानों के महाआंदोलन का ऐलान, 9 सितंबर से हाईवे घेरने की चेतावनी

30 दिन की मोहलत खत्म, समस्याओं पर कार्रवाई नहीं होने से किसान संगठन नाराज — शहडोल-डिंडोरी के किसान भी देंगे समर्थन


   उमरिया। जिले में किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन ने प्रशासन को दिए 30 दिन के समय की अवधि पूरी होने के बावजूद समस्याओं के निराकरण की दिशा में ठोस पहल नहीं होने का आरोप लगाते हुए 9 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन “घेरा डालो, डेरा डालो” महाआंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।

भारतीय किसान संघ ने 21 जुलाई 2026 को किसानों की विभिन्न समस्याओं, विशेषकर पाली क्षेत्र में प्रस्तावित 9 नई निजी कोयला खदानों की अनुमति से जुड़े मुद्दों को लेकर जिला प्रशासन को कोयले की पोटली के साथ ज्ञापन सौंपा था। संगठन का कहना है कि प्रशासन को समस्याओं के समाधान के लिए 30 दिन का समय दिया गया था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी किसानों की मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

खनिज क्षेत्र की बैठक में किसानों को नहीं बुलाने पर सवाल

किसान संगठन के अनुसार 25 अगस्त को कमिश्नर एवं कलेक्टर स्तर पर खदानों से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई, लेकिन किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए किसान संगठनों को बैठक में शामिल नहीं किया गया। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है।

9 सितंबर से सड़क पर उतरेंगे किसान

भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि 9 सितंबर को शहडोल-घुनघुटी राष्ट्रीय राजमार्ग पर “घेरा डालो, डेरा डालो” आंदोलन के तहत प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि आंदोलन को आगे बढ़ाने की स्थिति में उमरिया जिले की सातों तहसीलों के प्रमुख मार्गों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही जिले के आवागमन से जुड़े अन्य मार्गों और रेल मार्ग पर भी आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी गई है।

संगठन ने कहा है कि आंदोलन को लेकर उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।

शहडोल और डिंडोरी के किसान भी देंगे साथ

किसान संगठन का दावा है कि शहडोल और डिंडोरी जिले के किसान भी उमरिया आंदोलन को समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में शामिल होंगे। ऐसे में 9 सितंबर से शुरू होने वाला यह आंदोलन आने वाले दिनों में बड़ा किसान आंदोलन बन सकता है।

अब नजर प्रशासन की अगली पहल पर है—क्या किसानों की मांगों पर बातचीत होगी या फिर उमरिया में सड़कों पर बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा?

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