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शहडोल जिले के वरिष्ठ वकील एवं समाजसेवी संदीप तिवारी ने कहा कि

 तालाब पाटो, जंगल काटो,आदिवासी एवं शा.जमीन पर निर्माण करो,—क्या यही विकास की परिभाषा है

शहडोल जिले के वरिष्ठ वकील एवं समाजसेवी संदीप तिवारी ने कहा कि

 कभी तालाबों का शहर कहलाने वाला शहडोल आज अपने ही जंगल, जमीन और जलस्रोतों के अस्तित्व को लेकर सवालों के घेरे में है। विकास के नाम पर आखिर किसका विकास और किसका विनाश हो रहा है?

आदिवासियों की जमीनों पर बड़े-बड़े शोरूम और व्यावसायिक निर्माण खड़े होने के आरोप हैं। सवाल यह है कि आदिवासी भूमि से जुड़े संवैधानिक संरक्षण और कानूनी प्रावधानों के बावजूद ऐसी जमीनों पर बड़े निर्माण आखिर कैसे संभव हो रहे हैं?

जंगल लगातार कट रहे हैं, तालाब लगातार पाटे जा रहे हैं, नदियों-नालों पर कब्जे के आरोप हैं और जलस्रोत लगातार नष्ट हो रहे हैं,शासकीय भूमियों पर कब्जे और प्लॉटिंग के सवाल उठ रहे हैं, अवैध कॉलोनियां बन रही हैं लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन्हें अनुमति कौन दे रहा है और किस आधार पर?

एक तरफ गरीब और आदिवासी अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष करता दिखाई देता है, दूसरी तरफ उसी क्षेत्र में बड़े-बड़े व्यावसायिक निर्माण खड़े दिखाई देते हैं,यदि ये निर्माण और भू-उपयोग  नियमों के विरुद्ध हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं? वर्षों से जमीनों के कथित   कारोबार, अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर सवाल उठते रहे हैं, फिर कार्रवाई क्यों नहीं होती? रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं होती? जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती? कौन जिम्मेदार है? कौन जांच करेगा?कौन रोकेगा?

क्या शासन-प्रशासन पर भूमाफियाओं के प्रभाव को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए?

कहीं ऐसा तो नहीं कि जंगल, जमीन, जलस्रोत और गरीब-आदिवासी—सब कुछ कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ता जा रहा है?

क्या यही विकास है—जहां तालाब प्लॉट बन जाएं, नाले निर्माण की भेंट चढ़ जाएं, जंगल कट जाएं, जलस्रोत मिट जाएं और आदिवासियों की जमीनों पर विशाल व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़े हो जाएं?

विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं जो आने वाली पीढ़ियों से उनका जंगल, पानी और जमीन छीन ले।

क्या  जमीनों के रिकॉर्ड, भू-उपयोग परिवर्तन, निर्माण अनुमतियों, कॉलोनी विकास की स्वीकृतियों और कथित अतिक्रमणों की निष्पक्ष जांच  नही होनी चाहिए विशेषकर आदिवासी भूमियों, शासकीय भूमियों और सार्वजनिक जलस्रोतों से जुड़े मामलों की ?  

शहडोल को बचाना है तो जंगल, जमीन और पानी बचाना होगा।

और जंगल, जमीन और पानी बचाना है तो एक दिन प्लान करते हैं जिम्मेदारी भी तय क आप पास करें, वो बहुत बोलता है।रनी होगी।

क्योंकि—जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो खेत की रखवाली कौन करेगा?

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