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तीन महीने से तालाब में डूबा सरकारी टैंकर, पंचायत की निगरानी पर बड़ा सवाल!

 तीन महीने से तालाब में डूबा सरकारी टैंकर, पंचायत की निगरानी पर बड़ा सवाल!

कमता पंचायत में सरकारी संपत्ति की ऐसी अनदेखी कि लाखों का संसाधन पानी में—सरपंच-सचिव की जवाबदेही पर उठे सवाल

    बुढ़ार। जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत कमता में सरकारी संपत्तियों के रखरखाव और पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। बसोर मोहल्ला स्थित तालाब में घाट निर्माण के दौरान पानी पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा सरकारी टैंकर कथित तौर पर करीब तीन महीने से तालाब में डूबा पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय बाद भी इसे बाहर निकालकर सुरक्षित रखने की पहल नहीं की गई।

घाट निर्माण पूरा होने के बाद जिस सरकारी टैंकर को बाहर निकालकर पंचायत की संपत्ति के रूप में सुरक्षित रखा जाना चाहिए था, वह आज भी तालाब के पानी में पड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि सरकारी संपत्ति की निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

जनता के पैसों की संपत्ति पानी में, जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं?

सरकार द्वारा पंचायतों को ग्रामीणों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए गए टैंकर आपातकालीन परिस्थितियों और पेयजल व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन कमता पंचायत में सरकारी टैंकर की कथित दुर्दशा पंचायत स्तर पर संपत्ति प्रबंधन की गंभीर तस्वीर सामने ला रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई सरकारी वाहन महीनों तक तालाब में पड़ा रहे और पंचायत के जिम्मेदारों को इसकी चिंता न हो, तो यह केवल लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि जवाबदेही की व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।

ठेकेदार से पंचायत तक—किसकी जिम्मेदारी?

बताया जा रहा है कि घाट निर्माण कार्य के दौरान टैंकर का इस्तेमाल किया गया था। निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद उसे तालाब से बाहर निकालने की जिम्मेदारी किसकी थी, यह जांच का विषय है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि टैंकर को इतने लंबे समय तक पानी में पड़े रहने देने से सरकारी संपत्ति को कितना नुकसान हुआ।

यदि टैंकर की मशीनरी, बॉडी या अन्य उपकरण पानी में रहने से खराब होते हैं, तो इसकी भरपाई कौन करेगा? क्या इसके लिए पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी और संबंधित ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होगी?

कलेक्टर स्तर की जांच की जरूरत

मामले में अब ग्रामीणों की मांग है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण कराया जाए और पूरे मामले की जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि—

- टैंकर तालाब में कब और किन परिस्थितियों में डूबा?

- करीब तीन महीने तक इसे बाहर क्यों नहीं निकाला गया?

- टैंकर किस मद या योजना से पंचायत को मिला था?

- वर्तमान में टैंकर की हालत क्या है?

- इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति की थी?

- सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है तो उसकी भरपाई किससे कराई जाएगी?

सवाल सिर्फ टैंकर का नहीं, पंचायत की जवाबदेही का है

कमता पंचायत में तालाब में डूबा सरकारी टैंकर अब महज एक वाहन का मामला नहीं रह गया है। यह सरकारी संपत्ति के रखरखाव, पंचायत की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है।

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