सीवर लाइन में नाबालिगों से कराई जा रही मजदूरी! शहडोल प्रशासन की सहभागिता से उड़ाई जा रही लेबर ला की धज्जियां
शहर में चल रहे सीवर लाइन निर्माण कार्य में लेबर लॉ के नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों को ताक पर रखते हुए ठेकेदारों द्वारा नाबालिग बच्चों से खतरनाक और भारी काम करवाया जा रहा है। बच्चों से बातचीत करने की कोशिश पर उन्हें तुरंत किनारे कर दिया जाता है, जिससे साफ होता है कि कहीं न कहीं बड़े स्तर पर गड़बड़ी और दबाव काम कर रहा है। सीवर लाइन का कार्य देख रहे मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट शहडोल के अधिकारियों को कमीशन से ही फुर्सत नहीं है, विभाग के द्वार सारा ठीकरा कंपनी के ऊपर छोड़ कर अपने को सही दिखाने का प्रयास किया जाता है ।
बताया जा रहा है कि ठेकेदारों की तरफ से रंगदारी और धमकाने जैसी हरकतें भी सामने आती हैं। यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या लेबर विभाग की आंखें बंद हैं या कहीं भीतरखाने मिलीभगत का खेल चल रहा है?
सीवर लाइन जैसे जोखिम भरे काम में नाबालिग बच्चों को लगाना न सिर्फ कानूनन अपराध है बल्कि मानवाधिकारों की भी खुली अवहेलना है। लेकिन प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी संदेहस्पद बना रही है। शहडोल लेबर डिपार्टमेंट से बात करने पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता है, ऐसा प्रतीत होता है हर चीज का कमीशन सेट है, फिर आप जिस तरह लेबर नियमों की धज्जियां उड़ाने है उड़ाओ ।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो यह बच्चों के साथ हो रहा अन्याय और ठेकेदारों की मनमानी यूं ही जारी रहेगी। प्रशासन और लेबर विभाग से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।
पूर्व में भी नाबालिक बच्चों से सीवर लाइन पर कार्य करने में रंगे हाथ पकड़ा गया है, उस समय भी कंपनी पर कार्यवाही करने के जगह उस नाबालिक बच्चे की ही बाल ग्रह में रखा गया था, कंपनी ओर विभाग के उपर कोई कार्यवाही नहीं की गई, इसे सारा खेल समझ मे आता है कि पेसो के दम पर नियम कानून भी घुटने टेक देता है, लेबर डिपार्टमेंट केवल छोटे लोगों पर ही कार्यवाही दिखाती है, बड़े बड़े कंपनियों से अपना हिसा लेने में व्यस्त है, देखना होगा कि क्या अब जिला प्रशासन कंपनी और विभाग पर कार्यवाही करता है या सारे नियम आम आदमी के लिए है ।

0 Comments