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महाराणा प्रताप गौरव सम्मान से विभूषित हुईं अंचल की विभूतियाँ: नगर पत्रकार परिषद ने आयोजित किया गरिमामय समारोह

 महाराणा प्रताप गौरव सम्मान से विभूषित हुईं अंचल की विभूतियाँ: नगर पत्रकार परिषद ने आयोजित किया गरिमामय समारोह

​धनपुरी में जुटे शहडोल, बुढ़ार और धिरौल के प्रबुद्धजन; पत्रकारों, समाजसेविओं, चिकित्सकों और अधिवक्ताओं का हुआ भव्य अभिनंदन 




​धनपुरी. शौर्य, पराक्रम और राष्ट्र-स्वाभिमान के शिखर पुरुष महाराणा प्रताप की जयंती के पावन अवसर पर नगर पत्रकार परिषद द्वारा एक भव्य एवं गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। बुधवार, 17 जून को ठीक रात 8:00 बजे बुढ़ार रोड स्थित नगर पत्रकार परिषद के मुख्य कार्यालय में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में शहडोल, बुढ़ार, धनपुरी और धिरौल अंचल की उन प्रबुद्ध विभूतियों को 'महाराणा प्रताप गौरव सम्मान' से नवाजा गया, जिन्होंने पत्रकारिता, समाजसेवा, चिकित्सा, शिक्षा और न्याय के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

​नगर पत्रकार परिषद के अध्यक्ष श्री शमीम खान के नेतृत्व और मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में अंचल के विकास और समाज सेवा में योगदान देने वाले सभी विशिष्ट जनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रत्येक सम्मानित होने वाली विभूति का मंच पर सबसे पहले माल्यार्पण कर भावभीना स्वागत किया गया और उसके पश्चात उन्हें गरिमामय प्रशस्ति पत्र भेंट कर अंचल के प्रति उनकी सेवाओं को रेखांकित किया गया।

​चारों क्षेत्रों के दिग्गजों का हुआ समागम

​समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल धनपुरी ही नहीं, बल्कि पड़ोसी नगर बुढ़ार, जिला मुख्यालय शहडोल और धिरौल अंचल के गणमान्य नागरिकों को एक मंच पर लाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इसे सामाजिक समरसता और अंचल के विकास को एक नई दिशा देने वाला आयोजन बताया।

​रात ठीक 8:00 बजे कार्यक्रम का शंखनाद हुआ। इसके बाद अतिथियों के माल्यार्पण, स्वागत और प्रशस्ति पत्रों के वितरण का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक निरंतर उत्साहपूर्वक चलता रहा।

​इन्हें मिला 'महाराणा प्रताप गौरव सम्मान'

​अंचल की जिन विभूतियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों और सामाजिक योगदान के लिए मंच से सम्मानित किया गया, उनका वर्गवार विवरण इस प्रकार है:

​पत्रकारिता क्षेत्र (लोकतंत्र के सजग प्रहरी): अंचल के निष्पक्ष और वरिष्ठ पत्रकार सनत कुमार शर्मा, राजीव अग्रवाल, मुरलीधर त्रिपाठी, संतोष शर्मा, प्रदीप शर्मा, मोहम्मद नदीम खान, अतीकुर रहमान (अतीक बाबा), राहुल सिंह राणा, जुनैद खान, शैलेंद्र तिवारी, शफीक खान एवं राजू अग्रवाल।

​सूचना का अधिकार (RTI) एवं सामाजिक सक्रियता: प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए निरंतर प्रयासरत आरटीआई एक्टिविस्ट असलम बाबा।

​विधि एवं न्याय क्षेत्र (कानूनी जगत की प्रतिष्ठित हस्तियाँ): प्रख्यात अधिवक्ता एडवोकेट अनिल द्विवेदी, एडवोकेट प्रदीप सिंह, एडवोकेट प्रभाकर सिंह धिरौल एवं एडवोकेट सुजीत जैन।

​चिकित्सा एवं विशिष्ट सेवा वर्ग: डॉ. विजय सिंह एवं डॉ. हीरामणि सोनी।

​शिक्षा एवं मार्गदर्शन क्षेत्र: ज्ञान की अलख जगाने वाले प्रख्यात सेवानिवृत्त शिक्षक ऋषिकेश दवे।

​सामाजिक एवं प्रबुद्ध वर्ग: गणेश प्रताप सिंह 'दादू', एसपी सिंह, दिग्विजय सिंह, विनोद शर्मा, गुदुम सिंह और राजेंद्र मिश्रा (शहडोल)।

​व्यवसाय एवं समाजसेवा: बृजवासी अग्रवाल एवं कैलाश महोबिया।

​विशिष्ट नागरिक एवं सेवाभावी: मुबारक मास्टर तथा असलम खान बाबुल।

​वक्ताओं ने रेखांकित किए महाराणा प्रताप के आदर्श

​समारोह के दौरान मंच से प्रबुद्ध वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन, उनके संघर्ष और जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

​अंचल के वरिष्ठ और निष्पक्ष पत्रकार श्री सनत कुमार शर्मा ने पत्रकारिता और सामाजिक मूल्यों को जोड़ते हुए कहा:

​"महाराणा प्रताप का पूरा जीवन ही एक संदेश है। उन्होंने महलों के ऐश्वर्य को छोड़कर जंगलों की खाक छानना स्वीकार किया, लेकिन अपनी स्वतंत्रता और स्वाभिमान का सौदा नहीं किया। आज पत्रकारिता और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में काम करने वाले हर व्यक्ति के लिए उनका यह संघर्ष एक बड़ी प्रेरणा है। एक निष्पक्ष कलमकार का भी यही दायित्व है कि वह बिना किसी दबाव के, सच्चाई और स्वाभिमान के साथ समाज की आवाज़ को बुलंद रखे।"

​वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विजय सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा:

​"महाराणा प्रताप का जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, मनुष्य को अपने आत्मसम्मान और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। आज के दौर में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। चिकित्सा हो या कोई अन्य क्षेत्र, यदि हम उनके राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा के एक अंश को भी अपने जीवन में उतार लें, तो समाज का कल्याण निश्चित है।"

​विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट प्रदीप सिंह ने कानून और न्याय के दृष्टिकोण से बात रखते हुए कहा:

​"महाराणा प्रताप केवल अपनी तलवार के पराक्रम के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रजा के प्रति अगाध न्यायप्रियता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था खड़ी की जहां समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का भी मान सुरक्षित था। आज विधिक क्षेत्र और समाज के हर जागरूक नागरिक का यह दायित्व है कि हम उनके दिखाए सत्य, न्याय और समरसता के मार्ग पर चलकर एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका तय करें।"

​"महाराणा प्रताप के मूल्य ही सशक्त समाज की नींव"

​समारोह के मुख्य उद्बोधन में नगर पत्रकार परिषद के अध्यक्ष श्री शमीम खान ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा:

​"महाराणा प्रताप केवल इतिहास के एक पन्ने नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना हैं। उनका जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करने की सीख देता है। आज जिन विभूतियों का सम्मान इस मंच से किया गया है—चाहे वे कलम के सिपाही हमारे पत्रकार साथी हों, समाज को पारदर्शी बनाने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट हों, सेवानिवृत्त शिक्षक हों, चिकित्सक हों या न्याय के स्तंभ हमारे प्रख्यात अधिवक्तागण हों—वे सभी अपने-अपने कर्मक्षेत्र में इसी निष्ठा के साथ समाज को संवारने का काम कर रहे हैं। शहडोल, बुढ़ार, धनपुरी और धिरौल की इन प्रतिभाओं को सम्मानित कर स्वयं पत्रकार परिषद गौरवान्वित महसूस कर रही है।"

​राजू अग्रवाल ने माना आभार

​समारोह के अंतिम चरण में, कार्यक्रम की गरिमा को बनाए रखने और इसे सफल बनाने के लिए परिषद की ओर से वरिष्ठ पत्रकार श्री राजू अग्रवाल द्वारा मंच से विधिवत आभार प्रदर्शन किया गया। उन्होंने सुदूर अंचल से पधारे सभी सम्मानित प्रबुद्धजनों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों और समाजसेवियों के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की। श्री राजू अग्रवाल ने कहा कि आप सभी की गरिमामय उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है और नगर पत्रकार परिषद भविष्य में भी समाज को जोड़ने वाले ऐसे प्रयास निरंतर करती रहेगी।

अंचल में आयोजन की चौतरफा सराहना

​रात के सन्नाटे में बुढ़ार रोड स्थित कार्यालय में आयोजित इस गरिमामय और अनुशासित कार्यक्रम की गूंज पूरे कोयलांचल में सुनाई दे रही है। इस सफल आयोजन पर क्षेत्र के प्रबुद्धजीवियों, वरिष्ठ पत्रकारों और विभिन्न राजनैतिक-सामाजिक संगठनों ने नगर पत्रकार परिषद के अध्यक्ष श्री शमीम खान एवं उनकी पूरी कार्यकारिणी को साधुवाद दिया है। उपस्थित जनों ने माना कि समाज के कर्णधारों का पहले माल्यार्पण कर स्वागत करना और फिर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करना, परिषद की एक अत्यंत सुंदर और अनुकरणीय परंपरा को दर्शाता है।

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