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पंचायतों में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन या ‘हिस्सेदारी’ की मांग? उपसरपंच महासंघ के बयान से उठे सवाल

 पंचायतों में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन या ‘हिस्सेदारी’ की मांग? उपसरपंच महासंघ के बयान से उठे सवाल

शहडोल | 11 अगस्त से धरने का ऐलान, प्रेसवार्ता में प्रभाकर तिवारी के कथित बयान ने आंदोलन के उद्देश्य पर खड़े किए सवाल

शहडोल जिले की ग्राम पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार, मनमानी और निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों की अनदेखी के खिलाफ उपसरपंच महासंघ ने 11 अगस्त से आंदोलन और धरना शुरू करने का ऐलान किया है। महासंघ का आरोप है कि कई पंचायतों में सरपंच और सचिव द्वारा नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से काम कराए जा रहे हैं तथा बिना काम कराए राशि निकालने जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

रविवार को आयोजित प्रेसवार्ता में महासंघ के संचालक एवं उपसरपंच प्रभाकर कुमार तिवारी ने पंचायतों में पारदर्शिता, सभी पंचों और उपसरपंचों की भागीदारी तथा पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिकायतों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

लेकिन इसी प्रेसवार्ता के दौरान पूछे गए एक सवाल ने पूरे आंदोलन की मंशा को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया।

सवाल भ्रष्टाचार रोकने का था, जवाब ने बढ़ा दी चर्चा

प्रभाकर तिवारी से सवाल किया गया कि यदि पंचायतों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए उपसरपंच और पंचों के सामने पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी, तो क्या इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी भ्रष्टाचार की व्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर नहीं मिलेगा?

सवाल के जवाब में तिवारी के कथित बयान को लेकर अब चर्चा तेज है। उनके जवाब का आशय बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार कम होगा और उपसरपंच-पंचों को भी भ्रष्टाचार के पैसे में हिस्सा मिलेगा।

यही कथित बयान अब महासंघ के आंदोलन के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आंदोलन का मकसद वास्तव में पंचायतों से भ्रष्टाचार खत्म करना है या फिर भ्रष्टाचार की कथित व्यवस्था में सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करना?

अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई है, तो ‘हिस्सेदारी’ की बात क्यों?

महासंघ पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जरूरी भी है। लेकिन यदि आंदोलन का उद्देश्य भ्रष्टाचार खत्म करना है, तो किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार में हिस्सेदारी की बात गंभीर सवाल पैदा करती है।

हालांकि, इस बयान को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित पक्ष का पूरा संदर्भ और आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना भी जरूरी है। क्योंकि पंचायतों में भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों की जांच दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही होनी चाहिए।

11 अगस्त से धरना, प्रशासन की भूमिका पर भी नजर

उपसरपंच महासंघ ने 11 अगस्त से धरना और विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। महासंघ की प्रमुख मांगों में पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता, सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी और पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि शामिल है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन महासंघ की शिकायतों की जांच किस तरह करता है और आंदोलन के दौरान उठाए गए आरोपों पर क्या कार्रवाई होती है। साथ ही, प्रभाकर तिवारी के कथित बयान पर उनका स्पष्ट स्पष्टीकरण क्या आता है—यह भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।

क्योंकि सवाल सिर्फ पंचायतों में भ्रष्टाचार का नहीं है, सवाल यह भी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी होने वाली लड़ाई का असली उद्देश्य क्या है?

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