संजय गांधी ताप गृह में ठेका मजदूरों का बवाल – हाजरी 35 की, काम 17 से!
सुमंता डे और कंपनी पर गंभीर आरोप – मजदूरों ने कहा, “हमें दोबारा काम पर रखो”
बिरसिंहपुर पाली (उमरिया)।
संजय गांधी ताप विद्युत गृह की 500 मेगावाट यूनिट बंद होने के बाद ठेका मजदूरों की रोज़ी-रोटी पर संकट गहराता जा रहा है। बेरोजगार हुए मजदूरों ने उमरिया कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर एफ. ए. कंस्ट्रक्शन कंपनी के साइड इंचार्ज सुमंता डे और प्रबंधन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मजदूरों का कहना है कि टेंडर शर्तों के अनुसार 35 मजदूर रखना अनिवार्य है, लेकिन कंपनी केवल 17 लोगों से काम करवा रही है। हैरानी की बात यह है कि हाजरी और पीएफ पूरे 35 लोगों की भरी जा रही है। मजदूरों ने आरोप लगाया कि यह सब प्रबंधन और सुमंता डे की मिलीभगत से हो रहा है।
✦ 15–16 साल की सेवा के बाद बेरोजगारी
मजदूरों ने बताया कि वे पिछले 15–16 सालों से प्लांट में काम कर रहे थे और उनके परिवार की आजीविका पूरी तरह इसी पर निर्भर थी। लेकिन यूनिट बंद होते ही उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि जब यूनिट दोबारा चालू होगी तो नए लोगों को लिया जाएगा। मजदूरों ने इसे “मजदूर विरोधी और असंवेदनशील निर्णय” बताया।
✦ मजदूरी में अनियमितता और शोषण
मजदूरों का आरोप है कि कंपनी कभी 4500 तो कभी केवल 3500 रुपये महीना वेतन देती रही, जिससे परिवार का पालन-पोषण मुश्किल हो गया। इतना ही नहीं, कई महीनों की मजदूरी अब तक बकाया है। उनका कहना है कि यह शोषण खुलेआम साइड इंचार्ज सुमंता डे की जानकारी और सहमति से होता रहा।
✦ परिवार भुखमरी की कगार पर
मजदूरों ने कहा कि अचानक रोजगार छिन जाने और बकाया भुगतान न मिलने से वे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। यदि उन्हें तुरंत वेतन नहीं मिला और काम पर वापस नहीं रखा गया, तो उनके परिवार भुखमरी की स्थिति में पहुंच जाएंगे।
✦ कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
शिकायत में मजदूरों ने साफ कहा है कि यूनिट बंद होने का खामियाजा केवल ठेका श्रमिकों पर डालना अमानवीय है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि बकाया मजदूरी का तत्काल भुगतान कराया जाए और सभी मजदूरों को पुनः काम पर बहाल किया जाए।
✦ आंदोलन की चेतावनी
मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने मुख्य अभियंता, सुमंता डे और एफ.ए. कंस्ट्रक्शन कंपनी की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।


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