एआईओसीडी ने जीएसटी 2.0 संक्रमण के दौरान छोटे दवा विक्रेताओं की राहत की माँग की
सिद्दीक अंसारी मीडिया प्रभारी जिला दवा विक्रेता संघ शहडोल
शहडोल। जिला दवा विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष उमेश पांडे और जिला सचिव संदीप चपरा ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर बताया कि ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD), जो देशभर के 12.5 लाख से अधिक केमिस्टों और वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने माननीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से छोटे खुदरा विक्रेताओं और केमिस्टों को हो रहे घाटे से बचाने हेतु तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है। इसके लिए एक ज्ञापन भी प्रेषित किया गया है।
एआईओसीडी के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे और सचिव राजीव सिंघल ने ज्ञापन में मुख्य बिंदुओं को उजागर किया—
• जीएसटी दरों में कटौती (18% से 5%, 12% से 0%, 12% से 5%) से उपभोक्ताओं को लाभ तो मिला है, किन्तु छोटे विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
• अनरजिस्टर्ड और कम्पोजिट डीलर द्वारा उच्च जीएसटी दरों पर खरीदे गए स्टॉक को अब कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है, जिससे भारी नुकसान हो रहा है, जबकि दवा पर मार्जिन एनपीपीए द्वारा तय किया जाता है।
• अधिकांश छोटे व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत नहीं हैं या कम्पोजिट डीलर हैं, जिन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं मिलता।
• एआईओसीडी ने सरकार से माँग की है कि तीन माह तक छोटे व्यापारियों को पुराने एमआरपी पर स्टॉक विक्रय की अनुमति दी जाए। यदि आवश्यक हो तो विशेष राहत पैकेज भी घोषित किया जाए। साथ ही इस संक्रमण काल में उनके साथ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न हो।
एआईओसीडी ने चेतावनी दी है कि यदि छोटे व्यापारियों को राहत नहीं मिली तो अनेक दवा दुकानें बंद हो सकती हैं, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होगी। यह स्थिति सरकार की जिम्मेदारी बनेगी।
जिला दवा विक्रेता संघ शहडोल ने भी सरकार से इस ऐतिहासिक सुधार के दौरान छोटे खुदरा दवा व्यापार की सुरक्षा हेतु तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है।

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