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5 फरवरी को ऐतिहासिक धरना, प्रशासन को सौंपा जाएगा जन-ज्ञापन

 केशवाही की धरती पर उठेगा अधिकारों का तूफान

5 फरवरी को ऐतिहासिक धरना, प्रशासन को सौंपा जाएगा जन-ज्ञापन


शहडोल | केशवाही।

वर्षों से उपेक्षा, वादों और फाइलों में दबे विकास कार्यों के खिलाफ अब केशवाही की जनता सड़क पर उतरने जा रही है।

उप-तहसील, 50 सीटर अस्पताल, पुलिस थाना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, वनाधिकार पट्टा और शिक्षा सुविधाओं जैसी ज्वलंत मांगों को लेकर 5 फरवरी 2026, मंगलवार को सुबह 11 बजे, केशवाही नया बस स्टैंड के पास एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

यह धरना केवल विरोध नहीं, बल्कि जनता के हक और सम्मान की निर्णायक लड़ाई माना जा रहा है।

विकास से वंचित क्षेत्र, अब आर-पार की लड़ाई

केशवाही और आसपास के दर्जनों गांवों की आबादी आज भी स्वास्थ्य, प्रशासन, सुरक्षा और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकने को मजबूर है।

बीमारी में मीलों दूर अस्पताल जाना पड़ता है, छोटे विवादों में भी थाना दूर होने से परेशानी बढ़ती है और वन क्षेत्रों में रहने वाले गरीब आदिवासी आज भी वनाधिकार पट्टे के इंतजार में हैं।

इन्हीं गंभीर समस्याओं को लेकर क्षेत्र की जनता अब संगठित होकर शासन को आईना दिखाने जा रही है।

ये हैं प्रमुख मांगें

* केशवाही को उप-तहसील का दर्जा देकर प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध कराई जाए

* क्षेत्र में 50 सीटर अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोला जाए

* केशवाही में स्थायी पुलिस थाना स्थापित किया जाए

* वन क्षेत्रों में वर्षों से बसे आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे प्रदान किए जाएं

* शासकीय विद्यालय में 10वीं व 12वीं कक्षाएं प्रारंभ की जाएं

जनप्रतिनिधि और संगठन होंगे एक मंच पर

इस ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, जिला व ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी, सरपंच, उपसरपंच, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों ग्रामीण शामिल होंगे।

आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक होगा और प्रशासन को मांगों से जुड़ा विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।

जनता से अपील

आयोजक मंडल ने आदिवासी समाज, किसानों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस आंदोलन को ऐतिहासिक बनाएं, ताकि केशवाही की आवाज़ भोपाल तक गूंज सके।

 अब सवाल यह नहीं कि मांगें जायज़ हैं या नहीं,

सवाल यह है कि शासन कब तक केशवाही की अनदेखी करता रहेगा?

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