जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र में लगातार दो दिनों में दो बाघों की मौत, एनटीसीए व वन विभाग की कड़ी निगरानी में पूरी हुई कार्रवाई
शहडोल। जिले के जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम करपा, बीट बनचाचर की राजस्व भूमि पर लगातार दो दिनों में एक मादा एवं एक नर बाघ की मृत्यु की घटनाएं प्रकाश में आई हैं।
पहली घटना 01 फरवरी 2026 को मादा बाघ की तथा दूसरी घटना 02 फरवरी 2026 को नर बाघ की मृत्यु से संबंधित है।
घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), नई दिल्ली एवं कार्यालय मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश (भोपाल) से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप वन विभाग द्वारा त्वरित, संवेदनशील एवं पारदर्शी कार्रवाई प्रारंभ की गई।
घटनास्थल सुरक्षित, डॉग स्क्वाड से सघन छानबीन
वन अमले द्वारा तत्काल दोनों घटनास्थलों को पूरी तरह सुरक्षित किया गया। किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की आशंका को दृष्टिगत रखते हुए डॉग स्क्वाड की सहायता से घटनास्थल एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में गहन तलाशी और छानबीन अभियान चलाया गया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम
दोनों मृत बाघों का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों
डॉ. राजेश तोमर (बी.टी.आर.) एवं डॉ. अभय सिंगर (एस.टी.आर.) द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किया गया।
पोस्टमार्टम के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बाघों के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए, जिससे प्रथम दृष्टया अवैध शिकार की संभावना से इनकार किया गया है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूर्ण होने के बाद ही सामने आएगा।
नियत प्रक्रिया अनुसार अंतिम संस्कार
नियत प्रक्रिया के अनुसार दोनों बाघों के शवों का शवदाह/भस्मीकरण किया गया। यह कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक श्री महेन्द्र प्रताप सिंह (भा.व.से.), वनवृत्त शहडोल,
वनमण्डलाधिकारी उत्तर शहडोल श्रीमती तरुणा वर्मा (भा.व.से.),
तहसीलदार श्रीमती सुषमा धुर्वे,
सरपंच श्री कृष्णकुमार सिंह, ग्राम पंचायत पसोद,
डॉ. ज्ञानेंद्र प्रजापति (एनटीसीए)
तथा अन्य प्रशासनिक एवं वन अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुई।
अन्य कार्यवाही में क्षेत्र संचालक श्री अनुपम सहाय (भा.व.से.), बी.टी.आर. एवं संबंधित अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे।
फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी, वन अपराध प्रकरण दर्ज
सम्पूर्ण प्रक्रिया की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी कराई गई है, ताकि जांच में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे। मामले को गंभीरता से लेते हुए वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया गया है तथा अग्रिम जांच एवं कानूनी कार्रवाई जारी है।
वन विभाग की सख्ती, संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाघ जैसे संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोष पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी


0 Comments