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हक़ से वंचित सफाई कर्मी सड़कों पर पार्षदों नें मिलाया कंधे से कंधा

 हक़ से वंचित सफाई कर्मी सड़कों पर पार्षदों नें मिलाया कंधे से कंधा

नगरपालिका की लापरवाही से स्वच्छता व्यवस्था ठप

शहडोल/अनूपपुर/उमरिया

सफाई कर्मी और आउटसोर्स कर्मचारी आज सामूहिक हड़ताल पर उतर आए। वर्षों की निरंतर सेवा के बावजूद बकाया एरियस न मिलना, नियमितिकरण को बार-बार टालना और प्रशासनिक उपेक्षा ने कर्मचारियों में गहरा आक्रोश भर दिया है। संगठनों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका अधिकारियों ने कई दौर की बैठकों में आश्वासन दिए, समय सीमाएं भी तय कीं, लेकिन आज तक न तो उनका एरियस लगाया गया और न ही रोजगार सुरक्षा को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया गया। कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले ये कर्मचारी खुद को लगातार अनदेखी, असमान व्यवहार और आउटसोर्स व्यवस्था के नाम पर हो रहे शोषण से आहत बताते हैं।

हड़ताल का असर सुबह से ही शहर की सड़कों पर साफ दिखाई दिया। कई वार्डों में कचरा संग्रहण बंद रहा, नालियां साफ नहीं हुईं और जगह-जगह कचरे के ढेर जमा होने लगे—जिससे नागरिकों में भी असंतोष बढ़ता गया। कर्मचारियों का कहना है कि एरियस न मिलने से उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जबकि नियमितिकरण न होने से उनका भविष्य असुरक्षित है। इसी बीच पार्षदों ने भी कर्मचारियों के समर्थन में खुलकर सहयोग दिया। कई पार्षद मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों की मांगों को उचित बताते हुए प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। पार्षद सिल्लू रजक ने तो इस मुद्दे पर विशेष रूप से कड़ी नाराजगी जताई, कहा कि सफाई कर्मियों के साथ हो रहा अन्याय अब बर्दाश्त के बाहर है और प्रशासन को तुरंत समाधान करना चाहिए।

अब पूरा शहर इस इंतजार में है कि नगरपालिका प्रशासन आखिर कब कर्मचारियों की जायज़ और लंबे समय से लंबित मांगों पर निर्णय लेगा। कर्मचारियों का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ वेतन या एरियस का नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और स्थिर भविष्य की लड़ाई है—और जब तक इनके समाधान पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी। शहरवासी भी इनकी मांगों का समर्थन कर रहे हैं और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई है।

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